वो शहर, जो कल थे हरे-भरे : ( 2 ) /डॉ. रंजन ज़ैदी

पुरातत्वेत्ताओं ने एकमत से यह बात स्वीकार कर ली थी कि टीले के नीचे रेत के लिहाफ से ढका कोई ऐसा शहर ज़रूर दफ्न है जो मानव-इतिहास की टूटती कड़ियों को जोड़ सकता है और उसके अध्ययन से पता लगाया जा सकता है कि हमारी सभ्यता कितनी पुरानी है और प्रागैतिहासिक युग के मनुष्य ने उस काल तक कितना विकास कर लिया था।
इस सम्बन्ध में एक योजना के अंतर्गत इटली और जर्मनी के पुरातत्व विशेषज्ञों ने मिलकर अपने नेतृत्व में टीले के एक छोटे से इलाके की बड़ी सावधानी के साथ पुनः खुदाई शुरू कराई। इन वैज्ञानिकों के नाम थे, डॉ. माइकल जिनसेन और डॉ. मोरोज़ियोतोसी। इनके प्रयासों से की जा रही खुदाई  से जब रेत का लिहाफ हटा तो पता चला कि यह तो एक सभ्य, सुसंकृत और अपने समय के कुशल इंजीनियरों के हाथों सुनियोजित ढंग से निर्मित एक ऐसा शहर है जिसमें चौड़ी-चौड़ी सड़कें थीं. सड़कपन के किनारे चूना-मिटटी में पकाई गई ईंटों से चुनी गई कद्दावर रिहाइशी इमारतें थीं, कुछ कच्ची ईंटों के भी मकान रहे होंगे.
खोज से यह भी पता चला कि 85 से 200 हेक्टेयर में इन मकानों के केंद्रीय गर्भ-द्वार लकड़ी के हुआ करते थे. दरवाज़ों पर शानदार नक़क़ाशी का काम होता रहा होगा और इन मकानों में लगभग ४०,००० की आबादी रह रही होगी।
'मोइन जोदाड़ो' नामक इस शहर को योजनानुसार दो भागों में बांटा गया था. एक भाग में बनाई गई पक्की ईंटों वाले मकानो में किला नुमा ईमारत भी पाई गई है। उसकी सीमा में स्थित १२ मीटर ऊंचाई तक बुलंद नज़र आने वाली कच्ची ईंटों के मकान अवस्थित हैं जिसमें लगभग ५००० परिवार रहते रहे होंगे। क्षेत्र में केंद्रीय हमाम, कुआँ, बाज़ार और दो बड़े सार्वजनिक-हाल भी पाये गए हैं. पेय-जल की समुचित व्यवस्था में छोटे-बड़े कई कुँए, पानी के निकास से सम्बंधित नाले-नालियां। धार्मिक रिचुअल निभाने के उद्देश्य से लगभग २.४ मीटर के गहरे तालाब के निशान पाये गए हैं. यही नहीं, ७८ कमरों वाली एक ऐसी ईमारत के निशान भी बरामद हुए हैं जो किसी काम्प्लेक्स से कम नहीं है.
दुर्भाग्य यह है १९९६ में मोईन जोदाड़ो के प्रोजेक्ट्स को फंड्स के अभाव के कारण रोक दिया गया. लेकिन अप्रैल १९९७ में UNESC0 ने २०११ में अगले २० वर्षों के लिए इसकी देखभाल पर होने वाले १० मिलियन डालर का खर्च उठाने के लिए  सिंध प्रान्त की सरकार को ज़िम्मेदारी दी.
आज स्थिति यह है कि हमें मोहनजोदड़ों में प्रागैतिक-इतिहास के युग का जो शहर मिला है, उस शहर की दीवारें एक के बाद एक करके गिरती जा रही हैं. कल ऐसा भी होगा जब पाकिस्तान सरकार की उपेक्षा के कारण इतिहास की महान धरोहर रेत के  लिहाफ में फिर न छुप जाये००००००००                          (जारी /-३)   

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