न्याय की जीत, भ्रष्टाचार पराजित / नीना गर्ग
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| हम तो सहते हैं मगर वक़्त के आ जाने तक |
इंदिरापुरम (ग़ज़िआबाद ब्यूरो) : प्राप्त समाचारों के अनुसार आज मेरठ स्थित फर्म्स , सोसाइटीज़ एवं चिट्स फंड के क्षेत्रीय कार्यालय में एक ऐतिहासिक निर्णय के साथ भ्रटाचार पर लगाम लगा दी गई. खबर के अनुसार डिप्टी रजिस्ट्रार द्वारा आज इंदिरापुरम स्थित हाईटेक सोसाइटी
आशियना ग्रीन की
वेफैयर रेजिडेंट्स एसोसिएशन से सम्बंधित गहरे विवाद का न्याय-संगत निबटारा कर दिया. अपने निर्णय में सम्बंधित दोषियों पर आरोप लगते हुए कहा कि
सम्बंधित आरडब्लयुए अपने बाइलॉज को दरकिनार कर सोसाइटी रजिस्ट्रेशन ऐक्ट 1860 का निरंतर उल्लंघन करती आ रही थी. उन्होंने कहा िक़ इससे उचित उद्देश्यों के अनुरूप पंजीकृत नियमावली के अनुसार सोसाइटी शासित नहीं होती थी. अतः पुरानी पंजीकृत नियमावली को तत्काल प्रभाव से
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| बात निकली है बहुत दूर तलक जाएगी |
निरस्त किया जाता है
अपने निर्णय में उन्होंने कहा कि
नई पंजीकृत नियमावली के बनाये जाने हेतु सोसाइटीज़ रजिस्ट्रेशन ऐक्ट 1860 की धरा 24 (5) में निर्देश दिए जाते हैं. डिप्टी रजिस्ट्रार के आदेशानुसार-
आरडब्ल्यूए की कार्यरत प्रबंध समिति का वैधानिक अस्तित्व अब नहीं रहेगा.
- प्रबंध-समिति अगली पंजीकृत नियमावली के अनुसार सदस्य बनाने व चुनाव होने तक 'केयरटेकर' की भांति मात्र दैनिक क्रिया-कलापों का संचालन करेगी।
- आदेश के प्राप्त होने के एक सप्ताह के अंदर संस्था के तथाकथित अध्यक्ष/सचिव द्वारा जीबीएम बुलाई जाएगी।
- जीबीएम 7 सदस्यों वाली एक समिति का गठन करेगी जो समिति-नियमावली का पुनर्लेखन और निरीक्षण कर प्रत्येक रेज़िडेंट की सम्मति व साहमति लेगी.
- समिति नियमावली के अंतिम प्रारूप का पुनरीक्षण कर समस्त पक्षकार की संयुक्त संस्तुति के साथ कार्यालय पंजीकरण के लिए भेजा अजयेगा.
- कार्यालय पंजीकरण की संस्तुति और पंजीकरण के 15 दिनों के भीतर आरडब्ल्यूए की औपचारिक सदस्यता शुल्क वसूली वैध होगी.
सूचना के अनुसार आशियाना ग्रीन्स में काफी समय से रेजिडेंट्स के बीच
आरडब्ल्यूए के उच्च
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| आओ हम तुमको बताएं कि गुनहगार हो तुम |
पदाधकारियों के बीच बड़े पैमाने पर कथित वित्तीय अनियमितताएं हो रही थीं. अवैध रूप से सिंकिंग फंड तक से पैसा निकाल कर अनावश्यक मदों में खर्च किया जा रहा था. डीज़ल और दूसरे मदों में धड़ल्ले से चोरियां हो रही थीं. रेजिडेंट्स से अकारण पैसे की वसूलियाबी होती थी. कुछ रेजिडेंट्स एक कार के अतिरिक्त 4-4 कारें, जीपें और महंगे सेटिंग के साथ खड़ी करते थे, जिनके ड्राइवरों को कैम्पस में आने की आज़ादी पूरी छूट दे दी गई थी जिससे न केवल महिलाओं की सुरक्षा खतरे में पड़ गई थी, बल्कि उनका बच्चों के साथ उजड़ रहे पार्क तक में बैठना बंद हो गया था. और अनिधिकृत रूप से ड्राइवरों ने वे बच्चों के पार्क व वहां वृद्ध विश्राम छतरी तक पर कब्ज़ा कर लिया था. इससे अज्ञात आगंतुकों और असामाजिक तत्वों का कैम्पस के अंदर आना जाना जारी था.
असामाजिक तत्वों के आने के कारण घरों की सुरक्षा तक खतरे में पड़ने लगी थी. बहरूपियों के रूप में चोर उचक्के आसानी से आकर वारदात कर जाया करते थे. जैसे नई क़ीमती साइकिलों की चोरी, अवैध ग़ैर पंजीकृत गाड़ियों का अंदर खड़ा कर लेना. काम वाली बाइयों के पुलिस वेरिफिकेशन की उपेक्षा करना, सुरक्षा गार्डों की सांखियकी अनुपस्थि और उसमें वित्तीय अनियमितताएं आने-जाने वालों के लिए सर दर्द से कम नहीं था. पार्क लगभग उजाड़ दिए गए थे. घास का सौदा होने लगा था. एक आईएएस द्वारा भेंट की हुयी बागबानी से सम्बंधित महंगी मशीन तक को बेच दिया गया था. . पूरी व्यवस्था लगभग चरमरा सी गई थी. ऐसे में जान- पीआईएल का दाखिल करना स्वाभाविक था.
इन तमाम परिस्थितियों में समय-समय पर पुलिस प्रशासन को रेजिडेंट्स अपनी रूदाद सुनाते रहे. अंततः उप-जिलाधिकारी के आदेश पर उप-रजिस्ट्रार (पंजीकरण) के प्रयासों से विवाद को सुलझाया गया. ऐसे में अभी कुशल जिला अधिकारी, उप-जिलाधिकारी एवं रजिस्ट्रार (पंजीकरण) की प्रशासनिक कार्यवाई से अपराधियों पर क्या कार्यवाई होनी है, आशियाना के निवासियों को इस कार्यवाई का भी इंतज़ार रहेगा.
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